
गया | बिहार बैठक
बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से World Heritage Olympiad-2026 का आयोजन इस वर्ष पूरे बिहार में किया जाएगा। इसकी औपचारिक घोषणा शनिवार को गया कॉलेज के सभागार में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मगध रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) एवं ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ के मुख्य संरक्षक विकास वैभवशामिल हुए।

अपने संबोधन में विकास वैभव ने कहा कि प्राचीन काल में बिहार लंबे समय तक भारतीय सभ्यता, शिक्षा और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। आज भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैली ऐतिहासिक धरोहरें हमारे गौरवशाली अतीत की गवाही देती हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और विरासत को समझेगी, तभी वह भविष्य के लिए एक मजबूत और जागरूक समाज का निर्माण कर सकेगी।
उन्होंने कहा कि World Heritage Olympiad-2026 केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं को इतिहास, संस्कृति और धरोहर संरक्षण से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बिहार के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से इस ओलंपियाड में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि “आइए, मिलकर प्रेरित करें बिहार।”
गया से क्यों हुई शुरुआत?
ज्ञान, तप और आध्यात्मिक विरासत की भूमि गयाजी से इस अभियान की शुरुआत को विशेष महत्व दिया गया है। भगवान विष्णु की पावन नगरी और महाबोधि मंदिर जैसी विश्व प्रसिद्ध धरोहरों के कारण गया सदियों से आस्था, इतिहास और संस्कृति का केंद्र रहा है। ऐसे शहर से World Heritage Olympiad की शुरुआत यह संदेश देती है कि बिहार की विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
31 अगस्त तक होगा पंजीकरण
World Heritage Olympiad के प्रेसिडेंट डॉ. अनंताशुतोष द्विवेदी ने बताया कि फिलहाल राज्यभर के विद्यालयों और महाविद्यालयों का पंजीकरण किया जा रहा है। जिन संस्थानों ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है, वे 31 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सितंबर और अक्टूबर के दौरान बिहार के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में ओलंपियाड आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 19 से 25 नवंबर के बीच मनाए जाने वाले विश्व धरोहर सप्ताह के अवसर पर पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा।
गया कॉलेज के लिए गर्व का अवसर

गया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्रा ने कहा कि कॉलेज के लिए यह गर्व की बात है कि World Heritage Olympiad-2026 की शुरुआत इसी परिसर से हो रही है। उन्होंने कहा कि कॉलेज का प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस प्रतियोगिता में भाग लें और बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के बारे में गहराई से जानकारी प्राप्त करें।
बिहार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
बिहार विश्व की सबसे समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत वाले राज्यों में शामिल है। महाबोधि मंदिर, नालंदा महाविहार, राजगीर, वैशाली, विक्रमशिला और विष्णुपद मंदिर जैसे अनेक ऐतिहासिक स्थल आज भी देश-विदेश के लोगों को आकर्षित करते हैं। इसके बावजूद नई पीढ़ी का एक बड़ा वर्ग इन धरोहरों के इतिहास और महत्व से पूरी तरह परिचित नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि World Heritage Olympiad जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपने इतिहास, संस्कृति और पुरातात्विक धरोहरों के बारे में जानने का अवसर देंगे। इससे उनमें अपनी विरासत के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
विद्यार्थियों को क्या मिलेगा?

आयोजकों के अनुसार इस ओलंपियाड के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत और बिहार की विश्व धरोहर स्थलों, ऐतिहासिक स्मारकों, संस्कृति, पुरातत्व और विरासत संरक्षण से जुड़े विषयों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि छात्रों में शोध, जिज्ञासा और अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी है।
कार्यक्रम में गया के ओलंपियाड समन्वयक धीरेन्द्र केशरी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। मंच संचालन आकाश गिरी और आभाष कुमार ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर हिमांशु शेखर, आशी प्रीत, कुंदन प्रभाकर सहित ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ के कई समन्वयक उपस्थित रहे।
आयोजकों ने बताया कि इच्छुक विद्यालय, महाविद्यालय और विद्यार्थी 31 अगस्त 2026 तक पंजीकरण करा सकते हैं। सितंबर और अक्टूबर में राज्यभर के शैक्षणिक संस्थानों में ओलंपियाड आयोजित होगा, जबकि नवंबर में विश्व धरोहर सप्ताह के दौरान विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
World Heritage Olympiad-2026 को सफल बनाने के लिए Heritage India Olympiad Development Federation, Let’s Inspire Bihar और Heritage Society संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि यह पहल बिहार की सांस्कृतिक विरासत के प्रति युवाओं में नई सोच और जागरूकता पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

