Vivek, 26 February 2026

सुबह की हल्की धूप Airport Road पर उतरती है।
A.T. Gate के पास खड़े होकर जब अंदर की ओर नजर जाती है, तो दूर तक फैला परेड ग्राउंड दिखाई देता है।
एक साथ उठते कदमों की आवाज — धम… धम… धम…
यह सिर्फ परेड नहीं।
यह गया की बदलती पहचान की कहानी है।
लेकिन क्या आप जानते हैं — OTA बनने से पहले यहाँ क्या था?
और उससे भी पहले?
यह लेख आपको उसी ऐतिहासिक यात्रा पर ले जाएगा।
OTA से पहले क्या था? — ASC Centre का दौर
OTA Gaya की स्थापना वर्ष 2011 में हुई।
लेकिन उससे पहले यहाँ भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण शाखा कार्यरत थी:

ASC का काम क्या है?
- सेना को भोजन, राशन और ईंधन उपलब्ध कराना
- सैन्य परिवहन और सप्लाई चेन संचालन
- युद्धकाल में फ्रंटलाइन तक सामग्री पहुँचाना
गया का ASC Centre पूर्वी भारत में लॉजिस्टिक ट्रेनिंग का प्रमुख केंद्र था।
यहाँ ड्राइविंग, फील्ड सपोर्ट और सैन्य प्रशासन का प्रशिक्षण दिया जाता था।
स्थानीय लोग इस इलाके को वर्षों तक “ASC Centre” के नाम से जानते रहे।
ब्रिटिश काल: जब यह क्षेत्र बना सैन्य सप्लाई बेस

19वीं सदी के अंत तक यह इलाका मुख्यतः कृषि भूमि था।
लेकिन जब East Indian Railway का विस्तार हुआ (1860–1870 के दशक), गया एक प्रमुख रेलवे जंक्शन बन गया।
रेलवे कनेक्टिविटी के कारण:
- खुले भूभाग को सामरिक दृष्टि से चिन्हित किया गया
- अस्थायी सैन्य बैरक और सप्लाई डिपो बनाए गए
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) के दौरान लॉजिस्टिक गतिविधियाँ बढ़ीं
यही वह समय था जब यह क्षेत्र धीरे-धीरे स्थायी सैन्य उपयोग की दिशा में बढ़ा।
स्वतंत्रता के बाद: भारतीय सेना को हस्तांतरण
1947 के बाद यह क्षेत्र औपचारिक रूप से भारतीय सेना को मिला।
ब्रिटिश सैन्य संरचना को भारतीय ढांचे में समाहित किया गया और यहाँ ASC Centre को व्यवस्थित रूप दिया गया।
गया की यह जमीन अब स्थायी सैन्य परिसर बन चुकी थी।
2011: Officers Training Academy (OTA) Gaya की स्थापना

2011 में ASC Centre के विस्तृत परिसर में Officers Training Academy की स्थापना हुई।
यह भारत की तीसरी OTA बनी (देहरादून और चेन्नई के बाद)।
यहाँ मुख्यतः 10+2 Technical Entry Scheme (TES) के कैडेट्स को प्रशिक्षित किया जाता है।
प्रशिक्षण की विशेषताएँ
- लगभग 4 वर्ष का सैन्य + तकनीकी प्रशिक्षण
- नेतृत्व क्षमता और अनुशासन पर जोर
- हथियार संचालन और फील्ड क्राफ्ट
- उच्च स्तरीय शारीरिक प्रशिक्षण
हर छह महीने पर Passing Out Parade (POP)

वर्तमान में OTA Gaya में हर छह महीने पर Passing Out Parade (POP) आयोजित की जाती है।
आमतौर पर:
- एक POP मार्च–अप्रैल के आसपास
- दूसरी सितंबर–अक्टूबर के आसपास
POP वह क्षण होता है जब:
- Gentleman Cadet “Lieutenant” बनता है
- कंधे पर सितारे सजते हैं
- माता-पिता गर्व से खड़े होते हैं
- गया की धरती से नए सैन्य अधिकारी देश सेवा के लिए निकलते हैं
1971 युद्ध और स्थानीय चर्चाएँ

1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिक युद्धबंदी बने थे।
स्थानीय स्तर पर कुछ लोग कहते हैं कि उन्हें गया में रखा गया था।
हालाँकि उपलब्ध सार्वजनिक और आधिकारिक सैन्य रिकॉर्ड में गया को बड़े POW Camp के रूप में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
संभव है:
यह क्षेत्र ट्रांजिट प्वाइंट रहा हो इस विषय पर विस्तृत अभिलेखीय शोध अभी भी आवश्यक है।
गया की अर्थव्यवस्था और पहचान पर प्रभाव

OTA Gaya ji की स्थापना के बाद:
- Airport Road और A.T. Gate क्षेत्र विकसित हुआ
- किराये और भूमि मूल्य बढ़े
- स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला
- सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ
आज गया की पहचान दोहरी है:
- आध्यात्मिक नगरी
- सैन्य प्रशिक्षण केंद्र
संक्षिप्त ऐतिहासिक टाइमलाइन
| कालखंड | स्थिति |
|---|---|
| प्राचीन काल | कृषि भूमि, ग्रामीण क्षेत्र |
| 1860–1900 | रेलवे के बाद सामरिक महत्व |
| 1939–1945 | ब्रिटिश सैन्य सप्लाई बेस |
| 1947–2011 | ASC Centre |
| 2011–वर्तमान | OTA Gaya ji |
निष्कर्ष: बदलती पहचान, स्थायी गौरव
गया को अक्सर सिर्फ पिंडदान और बोधगया की आध्यात्मिक धरती के रूप में देखा जाता है।
लेकिन सच्चाई इससे कहीं व्यापक है।
यह वही भूमि है जहाँ इतिहास ने खेतों की शांति से लेकर सैन्य अनुशासन तक का सफर तय किया है।
जहाँ कभी ग्रामीण भूभाग था, वहीं आज देश के भावी अधिकारी कठोर प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रसेवा की शपथ लेते हैं।
हर छह महीने पर होने वाली Passing Out Parade सिर्फ एक सैन्य आयोजन नहीं —
यह उस परिवर्तन का प्रतीक है जिसने गया की पहचान को नई दिशा दी है।
Bihar Baithak का मानना है कि बिहार की कहानी केवल अतीत के गौरव या चुनौतियों तक सीमित नहीं है — यह निरंतर निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रीय योगदान की कहानी है।
गया की यह सैन्य विरासत उसी बदलते बिहार की सशक्त तस्वीर है।

