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बिहार के गया जिले के लिए यह खबर सिर्फ एक सरकारी मंजूरी नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी तस्वीर है। गया में बनने वाले इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) को अब केंद्र सरकार से पर्यावरणीय मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही गया में एक आधुनिक, स्मार्ट और सुनियोजित औद्योगिक टाउनशिप के विकास का रास्ता साफ हो गया है।

यह मंजूरी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से दी गई है। परियोजना के तहत करीब 1,670 एकड़ भूमि को विकसित किया जाएगा, जिसे स्मार्ट सिटी और इंडस्ट्रियल हब के रूप में तैयार करने की योजना है।

क्यों खास है IMC गया परियोजना

यह परियोजना अमृतसर–कोलकाता औद्योगिक गलियारे (AKIC) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश के पूर्वी हिस्से को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाना है। बिहार लंबे समय से औद्योगिक विकास की रेस में पीछे रहा है, ऐसे में IMC गया को एक गेम चेंजर माना जा रहा है।सरकार का मानना है कि इससे न केवल उद्योग आएंगे, बल्कि गया और आसपास के जिलों में रोजगार, निवेश और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।

क्या-क्या होगा इस औद्योगिक टाउनशिप में

IMC परियोजना के तहत:

  • 1,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में औद्योगिक प्लॉट विकसित किए जाएंगे
  • छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए अलग-अलग ज़ोन होंगे
  • बिजली, पानी, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट की आधुनिक व्यवस्था
  • लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग की सुविधाएं
  • श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर

यह क्लस्टर सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक पूरी इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा।

कनेक्टिविटी बनेगी बड़ी ताकत

MC गया को पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) से जोड़ा जाएगा। इससे यहां बने उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी को लेकर भी शुरुआती सर्वे और मूल्यांकन शुरू हो चुका है, ताकि उद्योगों को किसी तरह की लॉजिस्टिक परेशानी न हो।

कौन कर रहा है परियोजना को लागू

इस पूरे प्रोजेक्ट को लागू करने की जिम्मेदारी बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) को दी गई है। यह एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है, जिसे केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से बनाया गया है।

इसमें:

  • एनआईसीडीसी (NICDC)
  • बीआईएडीए (BIADA)

मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि परियोजना तय समय और मानकों के अनुसार पूरी हो सके।

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पर्यावरण और विकास—दोनों पर फोकस

सरकार का दावा है कि IMC गया परियोजना में पर्यावरणीय संतुलन का खास ध्यान रखा जाएगा। हाल ही में जल भंडारण सुविधाओं, पाइपलाइन लेआउट और जल प्रबंधन को लेकर साइट निरीक्षण किया गया है।अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना आर्थिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।

बिहार के लिए क्या बदलेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि IMC गया:

  • बिहार में निवेश का माहौल बेहतर करेगा
  • स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएगा
  • गया को सिर्फ धार्मिक और पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि औद्योगिक पहचान भी देगा
  • राज्य के औद्योगिक नक्शे को नई दिशा देगा

एक अधिकारी के अनुसार, “IMC गया बिहार का पहला एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप होगा और यह राज्य के औद्योगिक भविष्य को नया आकार देगा।

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आगे क्या?

फिलहाल पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद अब अगला चरण इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और ज़मीनी काम शुरू करने का है। आने वाले महीनों में सड़क, पानी, बिजली और प्लॉट डेवलपमेंट से जुड़े काम तेज होने की उम्मीद है।

जैसे-जैसे इस परियोजना पर आगे की प्रगति होगी, उसका सीधा असर गया और पूरे बिहार पर देखने को मिलेगा।