बिहार में निवेश को लेकर सरकार का दावा, औद्योगिक क्षेत्र और विकास की तस्वीरबिहार में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की सरकारी योजना

15 दिन में लोन, 9000 एकड़ ज़मीन और सुरक्षा का सरकारी दावा

बिहार में उद्योग और निवेश को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
हालांकि, हाल के महीनों में राज्य सरकार के बयानों और नीतिगत फैसलों से यह संकेत मिल रहा है कि बिहार अब खुद को एक नए औद्योगिक गंतव्य के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

सरकार का कहना है कि बिहार में कंपनी या फैक्ट्री प्लांट लगाना अब पहले की तुलना में ज्यादा तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक हो गया है।

बिहार में कंपनी या फैक्ट्री लगाने में कितना समय लगता है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किसी भी उद्योग को शुरू करने में लगने वाला समय कई बातों पर निर्भर करता है।
जैसे—निवेश की राशि, उद्योग का प्रकार, ज़मीन की उपलब्धता और आवश्यक मंजूरियां।

सरकारी और औद्योगिक सूत्रों के अनुसार औसतन समय-सीमा इस प्रकार बताई जाती है:

  • छोटे और मध्यम उद्योग (MSME): 30 से 90 दिन
  • ₹100 करोड़ से अधिक के बड़े प्रोजेक्ट: 3 से 6 महीने
  • पावर प्लांट या भारी उद्योग: 6 महीने से 1 साल या उससे अधिक

हालांकि, यदि ज़मीन पहले से उपलब्ध हो और दस्तावेज़ पूरे हों, तो यह प्रक्रिया और भी तेज़ हो सकती है।

निवेशकों को सुरक्षा का भरोसा

इसी बीच, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में निवेश को लेकर सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दिलाया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था अब पहले से मजबूत है।

उनके अनुसार, उद्योग लगाने वाले निवेशकों को सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है।

15 दिन में लोन और 9000 एकड़ ज़मीन का दावा

सरकारी बयानों के मुताबिक, उद्योग नीति के तहत कुछ बड़े वादे किए गए हैं।
इनमें शामिल हैं:

  • उद्योग लगाने पर 15 दिनों के भीतर लोन उपलब्ध कराने की व्यवस्था
  • लगभग 9000 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण
  • 38 जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना

सरकार का कहना है कि इससे बिहार में उद्योगों का नेटवर्क बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

‘गुंडा बैंक’ पर कार्रवाई और निवेश माहौल सुधारने की कोशिश

इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा है कि अवैध सूदखोरी और तथाकथित ‘गुंडा बैंक’ सिस्टम पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

सरकार के अनुसार:

  • निवेशकों को डराने-धमकाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना प्राथमिकता है
  • आर्थिक लेन-देन को औपचारिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं

इसी क्रम में, फिनटेक सिटी जैसी नई योजनाओं की भी चर्चा सामने आई है, जिससे बिहार को आधुनिक आर्थिक ढांचे से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

‘गुंडा बैंक’ पर कार्रवाई और निवेश माहौल सुधारने की कोशिश

इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा है कि अवैध सूदखोरी और तथाकथित ‘गुंडा बैंक’ सिस्टम पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

सरकार के अनुसार:

  • निवेशकों को डराने-धमकाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना प्राथमिकता है
  • आर्थिक लेन-देन को औपचारिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं

इसी क्रम में, फिनटेक सिटी जैसी नई योजनाओं की भी चर्चा सामने आई है, जिससे बिहार को आधुनिक आर्थिक ढांचे से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

किन क्षेत्रों पर सरकार का विशेष फोकस है?

बिहार सरकार ने कुछ खास सेक्टरों को प्राथमिकता दी है।
इनमें शामिल हैं:

  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
  • डेयरी और चीनी उद्योग
  • स्वास्थ्य सेवाएं
  • टेक्सटाइल और लॉजिस्टिक्स
  • फिनटेक और सर्विस सेक्टर
  • सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों के जरिए बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार पैदा करना है, ताकि पलायन को रोका जा सके।

नोट:

यह लेख सार्वजनिक बयानों और सरकारी दावों पर आधारित जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है।
किसी भी निवेश निर्णय से पहले संबंधित विभागों और विशेषज्ञों से जानकारी लेना आवश्यक है।

Bihar Baithak