पटना | बिहार
बिहार फिल्म शूटिंग के क्षेत्र में अब एक नई पहचान बना रहा है।भारतीय फिल्म उद्योग में लोकेशन को लेकर एक बड़ा बदलाव साफ़ दिखाई देने लगा है।
लंबे समय तक मुंबई, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश तक सीमित रही शूटिंग अब बिहार की ओर रुख कर रही है।
राज्य सरकार द्वारा 37 से अधिक फिल्मों, वेब सीरीज़ और डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स को शूटिंग की मंज़ूरी दिए जाने के बाद बिहार धीरे-धीरे फिल्ममेकर्स की पहली पसंद बनता जा रहा है।
📽️ क्यों फिल्ममेकर्स बिहार की ओर देख रहे हैं?
फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के मुताबिक, बिहार अब सिर्फ “कहानी का विषय” नहीं, बल्कि कहानी की लोकेशन भी बन रहा है।
इसके प्रमुख कारण हैं:
- 🌍 Unexplored लोकेशन्स – गांव, शहर, घाट, पहाड़, ऐतिहासिक स्थल
- 🧑🤝🧑 Authentic लोकल कैरेक्टर और कल्चर
- 💰 कम लागत में हाई-वैल्यू प्रोडक्शन
- 🛂 सरल शूटिंग अनुमति प्रक्रिया
- 🚓 प्रशासनिक सहयोग और सुरक्षा
🎬 37 प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी: इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकेत
राज्य सरकार द्वारा जिन 37 से अधिक प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई है, उनमें:
- फीचर फिल्में
- OTT वेब सीरीज़
- डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में
शामिल हैं।
कई प्रोजेक्ट्स की शूटिंग शुरू भी हो चुकी है, जो यह संकेत देता है कि बिहार अब सिर्फ संभावनाओं का राज्य नहीं, बल्कि execution का ग्राउंड बन रहा है।
OTT प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती दिलचस्पी
Netflix, Amazon Prime, SonyLIV जैसे प्लेटफॉर्म्स को अब:
- ग्राउंडेड स्टोरीज़
- रियल लोकेशन्स
- लोकल सोशल कॉन्टेक्स्ट
की ज़रूरत है — और बिहार इन तीनों मामलों में नेचुरल एडवांटेज देता है।
यही वजह है कि कई वेब सीरीज़ बिहार आधारित या बिहार में शूट हो रही हैं।
🎥 बिहार: अब सिर्फ बैकड्रॉप नहीं, कैरेक्टर है
फिल्म इंडस्ट्री में एक कहावत है —
“Location itself becomes a character.”
आज बिहार उसी दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां:
- लोकेशन कहानी को सपोर्ट नहीं, लीड कर रही है
- कैमरा बनावटी सेट नहीं, रियल लाइफ पकड़ रहा है
🎞️ लोकल टैलेंट और टेक्निकल सपोर्ट
फिल्ममेकर्स के लिए एक और बड़ा प्लस यह है कि बिहार में अब:
- लोकल एक्टर्स
- असिस्टेंट डायरेक्टर्स
- प्रोडक्शन टीम
- टेक्निकल सपोर्ट
तेज़ी से उभर रहा है, जिससे आउटसाइड क्रू पर निर्भरता कम हो रही है।
Bihar Baithak की टिप्पणी
Bihar Baithak मानता है कि
यह मौका सिर्फ फिल्मों की शूटिंग का नहीं, बल्कि बिहार को क्रिएटिव इकॉनॉमी हब बनाने का है।
अगर:
- नीति निरंतर बनी रहे
- लोकल टैलेंट को ट्रेनिंग मिले
- और कहानी कहने वालों को प्लेटफॉर्म मिले
तो आने वाले वर्षों में बिहार भारतीय सिनेमा के नए मैप पर स्थायी रूप से दर्ज हो सकता है।
🔚 निष्कर्ष
बिहार अब फिल्ममेकर्स की “दूसरी पसंद” नहीं रहा।
37 प्रोजेक्ट्स की मंज़ूरी यह साफ़ संकेत है कि इंडस्ट्री बिहार को सीरियसली टेक रही है।
अब सवाल सिर्फ इतना है —
क्या बिहार इस मौके को लॉन्ग-टर्म फिल्म डेस्टिनेशन में बदल पाएगा?
✍️ Writer: Vivek Kumar
Platform: Bihar Baithak
