Handpump Man of Bihar: 500 गांवों में पानी, एक इंसान का संकल्पबिना सरकारी पद और बिना शोर के, एक व्यक्ति ने बिहार के सैकड़ों गांवों में पानी की समस्या को समाधान में बदला।

गया, बिहार

चापाकल मैन बिहार के नाम से मशहूर विवेक कुमार कल्याण ने गया जिले से शुरू होकर पूरे बिहार में पानी की समस्या से लड़ने की मिसाल कायम की है।बिहार में पानी जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर जहां सरकारी योजनाएं अक्सर कागजों में उलझी दिखती हैं, वहीं गया जिले के बोधगया निवासी Vivek Kumar Kalyan ने अपने संकल्प और निरंतर प्रयास से हजारों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया है। आज उन्हें पूरे बिहार में ‘चापाकल मैन ऑफ बिहार’ के नाम से जाना जाता है।

20 साल की उम्र में लिया गया संकल्प

जिस उम्र में अधिकांश युवा अपने करियर और भविष्य की दिशा तय कर रहे होते हैं, उसी उम्र में विवेक कुमार कल्याण ने समाज के लिए जीने का फैसला किया।
साल 2004 के आसपास उन्होंने गांवों में महिलाओं को कई किलोमीटर दूर से पानी ढोते हुए देखा। तेज धूप, खाली बर्तन और थकी हुई आंखें—यही दृश्य उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया।उन्होंने तय किया कि पानी की इस समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

‘चापाकल मैन बिहार’ कैसे बने विवेक कुमार कल्याण

विवेक कल्याण ने शुरुआत अपनी बचत और पॉकेट मनी से की। पहले एक-दो चापाकल लगवाए, फिर धीरे-धीरे यह काम उनका मिशन बन गया।
आज स्थिति यह है कि:

  • बिहार के 500 से अधिक गांवों में
  • 2000 से ज्यादा नए चापाकल लगवाए जा चुके हैं
  • हजारों खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत कराई जा चुकी है

उनकी खास पहचान यह है कि जैसे ही किसी इलाके में पानी की किल्लत की सूचना मिलती है, 24 घंटे के भीतर उनकी टीम सक्रिय हो जाती है।

गरीब और महादलित बस्तियों पर विशेष फोकस

विवेक कल्याण का फोकस हमेशा उन इलाकों पर रहा है, जहां:

  • गरीब और महादलित समुदाय रहते हैं
  • महिलाएं और बच्चे पानी की सबसे ज्यादा परेशानी झेलते हैं

आज इन बस्तियों में पानी की नियमित उपलब्धता ने लोगों के जीवन को आसान बनाया है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह बदलाव बिना किसी सरकारी दबाव के, सिर्फ मानवीय संवेदना से संभव हुआ।

हर जिले में टीम, प्रशासन भी करता है संपर्क

विवेक बताते हैं कि उन्होंने बिहार के लगभग हर जिले में 5-5 लोगों की टीम तैयार कर रखी है।
दिलचस्प बात यह है कि अब:

  • गांवों से ही नहीं
  • शहरों से भी
  • और यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों के फोन भी उन्हें आते हैं

क्योंकि जहां सरकारी प्रक्रिया लंबी होती है, वहां विवेक कल्याण की टीम तेजी से समाधान करती है।

संस्था और विदेशी सहयोग

इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए विवेक कल्याण ने सिद्धार्थ कम्पैशन ट्रस्ट की स्थापना की।
बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटक उनकी पहल से इतने प्रभावित हुए कि:

  • कोई 20 चापाकल
  • कोई 30
  • तो कोई 50 चापाकल लगवाने की जिम्मेदारी लेने लगा

आज अमेरिका, वियतनाम, मलेशिया सहित कई देशों से लोग इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं।

कोरोना काल में अनोखी पहल

कोरोना महामारी के दौरान जब वैक्सीनेशन को लेकर लोग झिझक रहे थे, तब विवेक कल्याण ने एक अनोखा प्रयोग किया।
उन्होंने कहा—
“जिस गांव में वैक्सीन लगेगी, वहां चापाकल लगाया जाएगा।”

इस पहल से कई गांवों में वैक्सीनेशन को गति मिली और पानी की समस्या का समाधान भी हुआ।

राष्ट्रपति से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा

विवेक कुमार कल्याण के कार्यों की सराहना:

  • पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (राज्यपाल रहते हुए)
  • वियतनाम के राष्ट्रपति के प्रतिनिधिमंडल
    द्वारा भी की जा चुकी है।

यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर किया गया ईमानदार प्रयास वैश्विक पहचान भी पा सकता है।

पानी ही लक्ष्य है

विवेक कल्याण कहते हैं—

“मैंने कसम ली है कि जब तक जीवित रहूंगा, पानी की समस्या दूर करता रहूंगा।”

उनका सफर अब 20 साल पूरा कर चुका है, लेकिन उनका अभियान आज भी जारी है।


बिहार बाइठक की टिप्पणी

Bihar Baithak मानता है कि विवेक कुमार कल्याण जैसे लोग बिहार का असली चेहरा हैं—
जो बिना शोर, बिना प्रचार और बिना सत्ता के सहारे
समाज में स्थायी बदलाव लाते हैं।

✍️ Writer: Vivek Kumar
Platform: Bihar Baithak