गया, बिहार
बिज़नेस जगत में सफलता की कई कहानियाँ सुनने को मिलती हैं, लेकिन कुछ यात्राएँ ऐसी होती हैं जो केवल प्रेरित नहीं करतीं, बल्कि एक व्यावहारिक बिज़नेस मॉडल भी प्रस्तुत करती हैं।
Pramod Kumar Bhadani की यात्रा ऐसी ही एक उदाहरण है।
शुरुआती दौर: सीमित संसाधन, स्पष्ट दृष्टि

1980–90 के दशक के अंत में, गया जैसे छोटे शहर से प्रमोद भदानी और उनके भाई ने अपने पिता से ₹2,500 उधार लेकर एक छोटे ठेले पर लड्डू बेचने का काम शुरू किया।
उस समय न तो किसी तरह की ब्रांडिंग थी, न पूंजी निवेश और न ही कोई संगठित बाज़ार व्यवस्था।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रमोद भदानी इस दौर में प्रतिदिन लगभग 19 घंटे काम करते थे—रात में उत्पादन और दिन में बिक्री। यह चरण केवल आजीविका का नहीं, बल्कि बाज़ार की समझ विकसित करने का भी था।
पहला निर्णायक मोड़: ठेले से दुकान तक
वर्ष 2000 में व्यवसाय को एक स्थायी पहचान मिली, जब गया में पहली बार Pramod Laddu Bhandar के नाम से दुकान की शुरुआत की गई।
यह बदलाव केवल स्थान का नहीं, बल्कि असंगठित कार्य से व्यवस्थित व्यवसाय की ओर एक महत्वपूर्ण कदम था।
इसके बाद व्यवसाय ने:
- लड्डू के साथ अन्य पारंपरिक मिठाइयों को जोड़ा
- नमकीन और बेकरी उत्पादों का उत्पादन शुरू किया
- स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों पर विशेष ध्यान दिया
विस्तार और संगठन
समय के साथ व्यवसाय को औपचारिक रूप देते हुए Pramod Confectionery & Food Products कंपनी का गठन किया गया।
इस चरण में उत्पादन प्रणाली, सप्लाई चेन और वितरण नेटवर्क को संगठित किया गया।
परिणामस्वरूप, यह व्यवसाय:
- बिहार से बाहर झारखंड और अन्य राज्यों तक पहुंचा
- स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर एक क्षेत्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित हुआ
- राष्ट्रीय स्तर के स्थापित मिठाई ब्रांड्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने लगा
वर्तमान स्थिति
उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रमोद भदानी का व्यवसाय आज:
- बहु-आउटलेट मॉडल पर संचालित हो रहा है
- हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार प्रदान करता है
- 50 से 100 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार स्तर तक पहुंच चुका है
साथ ही, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में उनके योगदान के लिए उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया गया है।
बिज़नेस जगत के लिए प्रमुख सीख
प्रमोद भदानी की यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि:
- बड़ा व्यवसाय बड़े शहर से ही शुरू हो, यह आवश्यक नहीं
- पूंजी से पहले अनुशासन और प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है
- ब्रांडिंग से पहले उत्पाद की गुणवत्ता निर्णायक होती है
- सतत विकास के लिए Consistency सबसे बड़ा कारक है
निष्कर्ष
प्रमोद भदानी की कहानी केवल सफलता की नहीं, बल्कि व्यवस्थित सोच, दीर्घकालिक दृष्टि और ज़मीनी मेहनत की कहानी है।
यह यात्रा उन उद्यमियों के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद संगठित और स्थायी व्यवसाय खड़ा करने की सोच रखते हैं।
✍️ Writer: Vivek Kumar
Platform: Bihar Baithak
